नफ़रत भी कीजिए तो ज़रा मोहब्बत से कीजिए

दिल की धड़कन और मेरी सदा हो तुम,
मेरी पहली और आख़िरी वफ़ा हो तुम,
चाहा है तुम्हें चाहत से बढ़कर,
मेरी चाहत और चाहत की इंतहा हो तुम।

ऐसा नहीं है कि दिन नहीं ढलता
या रात नहीं होती,
पर सब अधूरा अधूरा सा लगता है
जब तुम से बात नहीं होती।

ग़म में हंसने वालों को रुलाया नहीं जाता,
लहरों को पानी से मिलाया नहीं जाता,

होने वाले हो जाते हैं खुद ही अपने,
किसी को कह कर अपना बनाया नहीं जाता।

रहे न कुछ मलाल बड़ी शिद्दत से कीजिए,
नफ़रत भी कीजिए तो ज़रा मोहब्बत से कीजए

दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,
ख्वाब बनकर नींदें चुराया ना करो,
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
तुम ख़्वाबों में आकर यूं तड़पाया ना करो।

सीने में जो दब गए हैं वो जज़्बात क्या कहें,
खुद ही समझ लीजये हर बात क्या कहें।

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
क़सूर तो उस चेहरे का है जो हमें सोने नहीं देता।

तलब, तमन्नाएं सब अधूरी रह जाती हैं,
अक्सर दिल जिसे चाहता है उससे दूरी रह जाती है।

कितना बेबस है इंसान किस्मत के आगे,
हर सपना टूट जाता है हक़ीक़त के आगे,
जिसने कभी दुनियां में झुकना नहीं सीखा,
वो भी झुक जाता है मोहब्बत के आगे

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