Safalata ki kuchh shayari

1.
सूरज की तपिश और बेमौसम बरसात को हमने हंस कर झेला है,
मुसीबतों से भरे दलदल में हमने अपनी जिंदगी को धंस कर ठेला है,
यूँ ही नहीं कदम चूम रही है सफलता आज इस खुले आसमान तले
ज़माने भर के नामों को पीछे छोड़ा है तब जाकर हमारा नाम फैला है।

2.
मिट जाता, बर्बाद हो जाता या बदनाम हो जाता मै,
सफलता की राहों पे गुमनाम हो जाता मैं,
शुक्रगुजार हूँ उस खुदा का जिसने हर कदम साथ दिया
कहाँ पहुँचता वरना इस मुकाम पर, इक मौत आम हो जाता मैं।

3.
चमक रहा हूँ जो सूरज का की तरह तो सब हैरान हैं क्यों?
मेरी कामयाबी से सब इतना परेशान हैं क्यों?
हर रात टकराया हूँ मैं इक नई मुसीबत से नई सुबह के लिए
सबको दिखा हुनर मेरा लेकिन
किसी ने न पूछा की ये जख्मों के निशान हैं क्यों?


4.
मिली जो मंजिल तो कारवां भी बड़ा लग रहा था,
वरना सफ़र में हर शख्स मुझे ठग रहा था,
यूँ ही नहीं पहुंचा हूँ आज मैं इस मुकाम पर
जब सो रहा था ये ‘जग’ तब मैं ‘जग’ रहा था।
जग1 = दुनिया, जगत
जग2 = जागना

5.
कौन कहता है कि बुने हुए ख्वाब सच्चे नहीं होते,
मंजिलें उन्हीं को नहीं मिलती जिनके इरादे अच्छे नहीं होते,
रूखी-सूखी रोटी और धक्के तो बहुत खाए हैं जिंदगी में लेकिन
आज देख रहा हूँ कि सफलता के फल कभी कच्चे नहीं होते।

6.
चमक रहा है सितारा आज ज़माने में मेरे नाम का
मिल गया हैं नतीजा मुझे मेरे काम का,
किसी चीज की जरूरत न रही मुझे
जबसे नशा चढ़ गया है मुझे सफलता के जाम का।

7.
गिरा रही थी जिंदगी मुझे बार-बार अलग-अलग ठोकरों से,
बर्ताव कर रहा हो जैसे कोई मालिक अपने नौकरों से,
हिम्मत और हौसले को मैंने फिर भी अपनी बैसाखियाँ बनायीं
पहुँच गया सफलता की मंजिल पे

8.
बिना लक्ष्य के जीने वाले इंसानों की जिंदगी कहाँ अमीर होती है,
जब मिल जाती है सफलता तो नाम ही सबसे बड़ी जागीर होती है।


9.
किसी की तमन्ना थी तो किसी की उम्मीदें जुड़ी थीं,
मेरी सफलता के लिए मेरी मेहनत बहुत कड़ी थी,
पहुँच कर मुकाम पर जो मुद कर देखा मैंने तो पाया कि
मुझसे आगे निकलने को दुनिया तमाम खड़ी थी।

10.
जो शतरंज की बिसात होती जिंदगी तो
मैं सिर्फ एक मोहरा ही बन कर रह जाता,
ये तो वो खाली किताब निकली जिसने
बादशाह बना दिया मुझको जो मैंने
खुद की किस्मत लिखनी शुरू की।

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11.
बीत गया है रास्ता की आज मैं अपने मुकाम पर हूँ,
सारे सफ़र सताती रही जिंदगी
थक चुका हूँ थोडा आज आराम पर हूँ।

12.
मिल गयी है सफलता तो नजरिये बदले हैं
जो थे कल तक दुश्मन आज करीबी निकले हैं,
ना ही बदला हूँ मैं ना ही मेरे अंदाज बदले हैं,
ये तो बस शुरुआत थी अभी तो पड़ाव अगले हैं।

13.
ख्वाब पूरे हो गए हैं मेरे कि आज चैन की नींद सोना चाहता हूँ,
बहुत देर से दूर था जिस आँचल से आज उसी माँ की गोद में सोना चाहता हूँ।

14.
माना कि पहुँच गया हूँ सफलता की ऊँचाइयों पर आज मैं,
लेकिन लोगों के दिलों में उतरने का हुनर आज भी रखता हूँ।

15.
मुझे तो खबर भी न थी की कौन-कौन साथ दौड़ रहा है मेरे
पहुंचा मंजिल पर तो पता चला की एक लम्बा कारवां मेरे पीछे था।


16.
एक जमाना था जब मैं तलाशता था रास्ता आसमान तक जाने का
एक आज का दौर है की सारा आसमान मेरा है।

17.
खोटा सिक्का जो समझते थे मुझे
आज मैं उनका ध्यान तोड़ आया हूँ,
जिंदगी की राहों में सफ़र लम्बा था मेरा
इसलिए क़दमों के निशान छोड़ आया हूँ।

18.
उड़ान भरी तो इतनी दूर निकल आया मैं,
न जाने इस मुकाम का मंजर क्या होगा?

19.
घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच
हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी,
बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन
कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।

20.
जिस सफ़र से होकर तू आज मुकाम पर पहुंचा है,
उसी सफ़र में आज कई दीवाने चल निकले हैं,
जानते नहीं नादान इन्हें जरूरत है इक जिद की
नन्हें कदमो से नापने आसमान चल निकले हैं
Vipin_Kumar_99

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