वो मैं हूं

गुजार दिये होंगे तुमने

  कई दिन,महीने,साल...


जो काट न सकोगे वो एक_रात "मैं" हूँ..,,


की होगी गुफ्तगू,

  तुमने कई दफा, कई लोगों से...


दिल पर जो लगेगी वो एक_बात "मैं" हूँ..,,


भीड़ में जब तन्हा 

   खुद को तुम पाओगे...


अपनेपन का एहसास जो करा दे

   वो एक_साथ "मैं " हूँ..,,


बिताये होंगे तुमने 

   कई हसीन_पल सबके साथ में...


जो भुला नही पाओगे,वो एक_याद "मैं" हूँ..,,

Vipinkumarpandeyg

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