वो दर्द मुझे आज भी कबूल है


आखिरी निशानी बोल कर तोहफे में दिया था,, वो दर्द हमें कबूल आज भी है,,,,
ये दुनिया है जनाब, यहां मोहब्बत के बदले धोके का उसूल आज भी है,,
वो अलग मगरुर हैं खुद में,
खुद से मिटा दिया है मुझको,,
और मेरी डायरी में महकता,।     
    एक गुलाब का फूल आज भी है,,,।

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