अभिनव की शायरी

1: ये ना सोच की तू नजर मै नहीं तो सामने भी नहीं
मेरा ये दिल बंद आखों से तुझे रूबरू देख सकता है
तुझे क्या लगता है तेरी बेवाफाई बस मै ही जानता हूं
मेरी आखों मै तो कोई पागल भी तुझे हूबहू देख सकता है
2: आज तक गजलें मेरी होठों ने पढ़ी है 
आज गजल पढ़ने मेरे आंखों का अश्क आया है 

अगर आज मेरे लफ्ज़ लड़खड़ा भी जाए दोस्त तो माफ करना मेरे दोस्त 

क्योंकि आज महफिल में  मुझे सुनने मेरा दोस्त आया है
अभिनव प्रताप

3: जो आए फरिश्तों को भी वैसा सुनहरा ख्वाब हो तुम

जमाने की छोड़ो मेरी जान मैं बताता हूं लाजवाब हो तुम


4: कि रात इतरा रही थी अपने अंधेरे पर मैंने चांद पर चांदनी का काजल लिख दिया

लोग पूछते हैं मुझसे वजह मेरे मुस्कुराने की 
मैंने ग़ज़ल में मां और आंचल लिख दिया 

अभिनव प्रताप

5:इससे पहले की तू मुझसे बेवफाई करके मुझे तोड़ देती
अपने इश्क़ का आशिया आने हाथ से उजाड़ लिया

ओर आज मुझे अपने पहचान बताने की कोई जरूरत नही
तूने रक़ीब के साथ रहके क्या उखाड़ लिया..!


6: जिस दिन महफिलों में सब मौत मौत पढेगे ना
उस दिन मैं तूफानों से लड़के जा बोलूंगा 
आज लोगों ने इस मोहब्बत सियासत सब कुछ पढ़ दिया 

जिस दिन ममता की बात होगी उस दिन मैं मां बोलूंगा



7:मेरी उम्मीद मेरे ही सामने बैठी है मुझसे यह उम्मीद लगाए

और हम इस कशमकश में बैठे हैं कि उसे देखे या गले से लगाए


8:इक्का-दुक्का दुश्मनों से मेरा क्या होगा
इक्का-दुक्का दुश्मनों से मेरा क्या होगा
मेरी तो लड़ाई पूरे जमाने से है

तुम्हें क्या लगता है ऐसी हिम्मत कहां से आई है मुझमें
*मैं बिहारी हूं और मेरी वाली हरियाणा से है*



9:जंगल के खूंखार शेर हो तुम 
बब्बर शेर के गले में पट्टे डालकर करने वाला सवारी हूं मैं 
अभी तक तुमने दोस्ती में बढे देखे हैं हाथ मेरे 
तुझे तेरी औकात दिखा दू वो बिहारी हूं मैं


10. अपनी मोहब्बत का इजहार अपनी   निगाहों   से करके वो पूछेंगी तो कह दूंगा नहीं कुछ भी नहीं 
मैं जानता हूं मेरी खयालों में गुमसुम रहती है दिन रात 
जब मैं पूछता हूं कि क्या हुआ तो *मां* कह देती है कि नहीं कुछ भी नहीं


11.तुम्हारे दिल में पनप रहा है जो हर रोज वही वाला खौफ में

 जिसका स्वागत तुम दरवाजे पर जाकर करती हो ना वही वाला रौब हूं मैं


12. अब की बार जो, नजर👀 मिली किसी से..
उसको देखना 👁️तक छोड़ देना !!
.
इससे 👎पहले की,
ये काम वो 👉करे......
अपना दिल 👉💓खुद से तोड़💔 देना....


13. 👉कुछ इसी तरह अपने अंदर की चिंगारी को  हमने आग बता दिया...
👉पहुँच कर मंज़िल पर, मंज़िल को मंज़िल का रास्ता बता दिया!!


14. *हमरे यहां वीकेंड फ्राइडे सैटर्डे और संडे नहीं होता है*
*हमरे लिए हफ्ता शुक्र शनिचर और इतवार होता है*
*ये बर्गर कोक फ्राइड राइस यह सब शहर वालों के नखरे हैं*
*हमरे लिए खाना लिट्टी चोखा और अचार होता है*
*यह शहर वाले प्यार करके टूट जाते है*
*और जब हमारा दिल टूटता है ना तो सर पर सीधे upsc सवार होता है*




14.तेरी हथेली से उगकर... मैं सूरज हो जाऊंगा,
तेरी बिंदिया पर ढलती हुई ..बनूँगा एक शाम...
.
तुम बस अपने पायल मैं खनका लेना मुझे,
मेहंदी मैं छुपा कर कहीं लिख लेना मेरा नाम..
.
अपने नाथ के पेंच मे सब चाहते मेरी दबा लेना,
फिर क्या ही औऱ बचेगा मेरा इस जग से काम ..
.
अपने काजल से मेरी राते बना देना स्याह सी,
अपनी आँखो को बना दो छलकता हुआ एक जाम..
.
तुम कहकर बुलाना मुझे अपनी ज़िंदगी,
मैं तुम्हे पुकारता रहु कहकर अपनी जान...


15.सिकंदर हालत के आगे नहीं झुकता
तारा टूट भी जाए जमी पर नहीं गिरता
गिरते हैं दरिया हजार समुंदर में
मगर कभी समुंदर दरिया में नहीं गिरता |



16. जंगल के खूंखार शेर हो तुम 
बब्बर शेर के गले में पट्टे डालकर करने वाला सवारी हूं मैं 

अभी तक तुमने दोस्ती में बढे देखे हैं हाथ मेरे 

तुझे तेरी औकात दिखा दू वो बिहारी हूं मैं



17.इक्का-दुक्का दुश्मनों से मेरा क्या होगा
इक्का-दुक्का दुश्मनों से मेरा क्या होगा
मेरी तो लड़ाई पूरे जमाने से है

तुम्हें क्या लगता है ऐसी हिम्मत कहां से आई है मुझमें

*मैं बिहारी हूं और मेरी वाली हरियाणा से है*


18.दुश्मन तिलमिला गए अपनी नाकामी पर 
जब उन्हें चलती हुई मेरी जान दिख गई 

इस शहर का सारा कहर एक पल में हवा हो गया 
जब वह गांव पहुंचा दरवाजे पर उसे मां दिख गई



19: मुद्दतों के मशक्कत के बाद मैं तेरी यादों से निकला 
जैसे ही छुटा मयखाने में गया और जी गया

बहुत शोर कर रहा था वह मग्रुर समंदर कल रात को 
उसे मुट्ठी में दबोचा जाम में मिलाया और पी गया


20. मैं नींद हूं तुम ख्वाब हो
मैं तारा हूं तुम मेहताब हो
मैं बस यह मूछ हूं 
तुम इसका रूआब हो

मै टिंडा और तोरी हूं 
तुम चटपटा सा कबाब हो

मैं दिन भर खर्च होता हूं मजदूरों की तरह
तुम मेरा हिसाब रखती हो 
तुम मुंशी लाजवाब हो



21.राहे मंजिल में 
सब गम चुन लिया  और खुशियों को छोड़ दिया मैंने

मेरी नाकामी पर कल आसमा हंस रहा था
 जमी पर आईना रखा और ठोकर मार कर तोड़ दिया हमने

VIPIN Kumar pandey G

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