सीढ़ियों पर चर्चा

बात है तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदाबाद शहर के सुलतान बाज़ार झेत्र की , जहां दो परम मित्र रहता था । था नहीं बल्कि आज भी रहते है । एक का नाम हेमन्त और दूसरे का नाम छतीस (दोनों बदले हुए नाम है)। 

दोनों ही सुलतान बाज़ार क्षेत्र के बहुत ही फेमस मिठाई की दुकान में काम करते है और जानकारी के लिए बता दूं कि मैं भी उसी दुकान में काम करता हूं। मैं आज से लगभग आठ नौ महीने पहले इस दुकान में काम करने के लिए आया । जैसे जैसे समय बीतता गया मुझे सीढ़ियों पर चर्चा नाम का एक  टॉपिक मिला और ये टॉपिक और स्टोरी दोनों ही चीज एक लंबू (बदला हुआ नाम) इसने बताया  । इन्होंने बताया कि दोनों परम मित्र (हेमन्त और छत्तीस) की किसी बात को लेकर (बात बताना कोई जरूरी बात नहीं समझता) बहुत बड़ा झगड़ा हो गया था और ये दोनों ही आपस में बात चीत करना बंद कर दिया  था। 

इन सब मामलों के कई महीने बाद हेमन्त नाम के लड़के ने एक नई स्कूटी खरीदा और अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों को पार्टी दिया । मगर अपने जीगरी यार छत्तीस को इन्वाइट नहीं किया । अगले दिन जब सभी ड्यूटी पर आने के बाद जब पता चला कि उसने अपने दोस्त को इन्वाइट नहीं किया था तो सभी नहीं उसे बहुत मज़ाक उड़ाया । उसके बाद सभी की बातो को सुनने के बाद वो उस स्वीट शॉप के पीछे छत पर जाने के लिए बने सीढ़ियों पर अपने दोस्त को जाने के लिए इशारा की । लाख लड़ाईयों के बाद भी इन दोनों ने एक दूसरे के दिए संकेत को समझा आखिर समझते कैसे नहीं थे तो आखिर जिगरी दोस्त, हेमन्त जब जाने लगा मिलने तो बाकियों ने फिर मजे के मुड में मजा लेते हुए पूछा कि कहां चले हेमन्त भाई । तो उसने कहा कुछ काम है आ रहा हूं तो दोस्तो ने कहा ठीक है वहां से हेमन्त चला गया । जब वो कई घंटों तक वापिस नहीं आए तो एक साथी देखने लिए गया तो देखा कि सीढ़ियों पर दोनों दोस्त बैठकर मजे में गप्पे मार रहे थे और मस्तिया कर रहे थे। वहीं से नाम दिया गया दो दोस्त की लड़ाई और फिर से हुई दोस्ती की सीढ़ियों पर चर्चा। 



कहानी कैसी लगी आप लोगो को नहीं मालूम क्यूंकि ये कहानी मेरे अनुभव पर नहीं बल्कि कानों से सुनी हुई लंबू की बातों से लिखी गई है ये घटना कितना सच है और कितना झूठ ये मुझे नहीं मालूम मगर जो भी है मुझे जबरदस्त लगी आप लोग अपना राय अवश्य दे 

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