#सीतामढी,
अपने जीवन में आजतक कोई कविता नहीं लिखनेवालीं
सीतामढ़ी जिले की सिंघवाहिनी पंचायत की मुखिया #RITU_JAISWAL दिहाड़ी मजदूरों की मौजूदा त्रासदी देख इतनी भावुक हुईं कि एक कविता रच डाली जो मन में कई सवाल खड़े कर रहे हैं
"कुछ खरी - कुछ खोटी
कुछ शिकवा - कुछ शिकायतें
कुछ मेरी - कुछ तेरी गिनानी है गलतियां
सच कहूँ बहकावे में तो मैं भी आया था,
फटे जिन्स वाले फ़ैशन ने तो मुझे ही लुभाया था,
कानो में इयरफोन और स्टाईल में कटे हुए बाल
बड़े से फ़ोन की स्क्रीन
और इंटरनेट की स्पीड तो मुझे ही भाया था।
आया था जब दिल्ली से कमा के
बगल वाले चाचा का बेटा
महंगे मोबाइल में बजते गानों के बीच
उसकी तकलीफ भी मैं कहाँ सुन पाया था।
पिताजी ने कई बार कहा बेटा रुक जाओ इतनी खेती है कि दोनों बाप-बेटे मिल कर मेहनत कर लेंगे किंतु मैं कहाँ सुन पाया था।
वो फटे जिन्स के फ़ैशन ने तो मुझे ही लुभाया था |
आज मैं नहीं मेरी लाश पड़ी है
कुरुक्षेत्र के थाने में,
थानेदार ये क्या कह रहे हैं
न इसका परिवार आ पायेगा ,
और न ही इसकी बॉडी भेजी जा पाएगी
ये लॉक डाउन जैसा शब्द भी मैं
कहाँ कभी सुन पाया था।
कई बार 10/10 के कमरे में अपने 10-15 मज़दूर भाइयों के साथ ठूंसा हुआ सोचता
खेती ही कर लेता तो अच्छा था,
पर गाँव जाकर फटी जिन्स वाली फैशन
दिखाने का मोह मैं कहाँ छोड़ पाया था।
आज उसी फटी जींस में कई जगह से मैं भी फटा
बस सुन रहा था बदबू आने से पहले बॉडी हटानी है,
जल्दी पोस्टमाटर्म करवाओ।
आज अपने मृत पड़े शरीर से बदबू आने का कारण
मैं ही तो हूँ
वो जो खेत के माटी की सौंधी खुशबू थी
मैं कहाँ ले पाया था।"
#तुलसी_कुमार
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