#आइए आज एक पत्रकार की कहानी सुनाता हूं कि कौन होता है पत्रकार ??
बिना तनख्वाह लोगों की न्यूजों को लगवाता हूँ
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
सुबह चार बजे का अलार्म भरकर सोना ,
चाहे वर्षा हो या सर्दी अखबार नहीं है खोना,
पकड़ साईकिल अखबार को लेने जाता हूँ,
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
घर घर जाकर लोगों को उनके हाथों में ही अख़बार को देना,
ना फेंकना इधर उधर तुम , न धरती पर रखना,
अगर कहीं हो जाऊं लेट गलियां भी खाता हूं,
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
चाहे दिन हो या रात न्यूज़ इकठ्ठा करना ,
पर अख़बार को यारों न्यूज़ वक्त पर ही देना,
जो कहीं न लग पाये न्यूज़ पैसे खाने वाला कहलाता हूँ ,
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
लोगों की मदद करके उनको खुश है करना,
चाहे अच्छी खबर मिले या बुरी खबर को लेना
फिर कुछ का दोस्त ज्यादा का दुश्मन बन जाता हूँ ,
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
*पांडेय जी* तेरी पत्रकारिता को दिल में बसाकर रखना,
अपने पूरे भारत को तुम संभालकर रखना,
यही बात अपने सभी पत्रकार भाइयों को समझाता हूँ,
*तब जाकर मैं एक पत्रकार कहलाता हूँ*
धन्यवाद
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