कुछ को खास तो कुछ को आम लगूं...
मैं सीधा-साधा लड़का न जाने क्यों तुम्हें बदनाम लगूं...
बाहर से देखो तो खुबसूरत बाग़ हूँ मैं,
अंदर से पूरा कब्रिस्तान लगूं...
न जाने क्या डर है उन्हें मेरे होने से,
मैं अकेला शख्स उन्हें पूरी अवाम लगूं...
मिटा देता हूँ यह डर भी तुम्हारा,
शख्सियत था मैं लो अब महज़ एक नाम लगूं...
Pandey G
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